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Samastipur News: Panchayat Conference: समस्तीपुर में जिला स्तरीय पंच सम्मेलन संपन्न, ग्रामीण रोजगार और पंचायतों की तैयारी पर जोर

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Alam Ki Khabar | Samastipur News | Bihar News | समस्तीपुर में VB-G RAM G योजना के तहत तीन दिवसीय जिला स्तरीय पंच सम्मेलन आयोजित हुआ। पंचायतों की संस्थागत तैयारी, 125 दिनों के रोजगार, पारदर्शिता और ग्रामीण विकास पर चर्चा हुई।

समस्तीपुर, 14 अगस्त। आलम की खबर: समस्तीपुर में विकसित भारत–रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन ग्रामीण यानी VB-G RAM G योजना के तहत आयोजित तीन दिवसीय जिला स्तरीय पंच सम्मेलन शुक्रवार को संपन्न हो गया। सम्मेलन का आयोजन 12 से 14 अगस्त 2026 तक डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के विद्वत सभागार में किया गया। इसमें त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ संबंधित पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया।

सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, पंचायतों की संस्थागत क्षमता और गांवों में विकास कार्यों को अधिक प्रभावी तरीके से लागू करने को लेकर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच समझ विकसित करना रहा। तीन दिनों के दौरान योजना के प्रावधानों, ग्राम पंचायत स्तर पर इसकी तैयारी और पारदर्शी क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

पंचायतों की तैयारी मजबूत करने पर जोर

सम्मेलन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि VB-G RAM G योजना को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए ग्राम पंचायतों की संस्थागत तैयारी मजबूत होनी चाहिए। इसके लिए पंचायत स्तर पर योजना बनाने से लेकर कार्यों के चयन, क्रियान्वयन और निगरानी तक की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने पर चर्चा हुई।

जनप्रतिनिधियों को योजना के प्रावधानों और उद्देश्यों की जानकारी देते हुए बताया गया कि ग्रामीण आबादी तक इसकी सही जानकारी पहुंचाना भी पंचायतों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम में आम लोगों के बीच विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम-2025 से संबंधित प्रावधानों और उद्देश्यों को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर भी चर्चा की गई।

125 दिनों के रोजगार की गारंटी

सम्मेलन के दौरान योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के गारंटीशुदा रोजगार से जुड़े प्रावधान की जानकारी दी गई। बताया गया कि यह योजना 1 जुलाई 2026 से पूरे राज्य में प्रभावी है।

योजना का उद्देश्य केवल ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि रोजगार के साथ गांवों में ऐसी परिसंपत्तियों का निर्माण करना भी है, जो लंबे समय तक ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय विकास में उपयोगी साबित हों।

योजना को विकसित भारत-2047 के व्यापक लक्ष्य से जोड़ते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, उत्पादकता और टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण पर जोर दिया गया।

चार प्रमुख क्षेत्रों में होंगे काम

सम्मेलन में योजना के तहत प्रस्तावित कार्यों की चार प्रमुख श्रेणियों पर भी विस्तार से जानकारी दी गई।

इनमें जल संबंधी कार्य एवं जल सुरक्षा, मूल ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका संबंधी अवसंरचना तथा चरम मौसम शमन एवं आपदा प्रबंधन की तैयारी को प्रमुखता दी गई है।

जल सुरक्षा से जुड़े कार्यों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण और उपलब्ध जल संसाधनों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर है। वहीं ग्रामीण अवसंरचना से संबंधित कार्य गांवों में आवश्यक सुविधाओं को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं।

आजीविका संबंधी बुनियादी ढांचे को ग्रामीण परिवारों के लिए आय के अवसरों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया। इसके अलावा बाढ़, अत्यधिक गर्मी, भारी बारिश और अन्य प्राकृतिक चुनौतियों से निपटने की तैयारी को भी योजना के दायरे में शामिल किया गया है।

सहभागिता आधारित पंचायत योजना पर जोर

सम्मेलन में ग्राम पंचायतों की विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बनाने पर भी चर्चा हुई। इसके लिए ग्रामीण लोगों की सहभागिता तथा उपलब्ध आंकड़ों और वास्तविक जरूरतों के आधार पर योजनाएं तैयार करने की आवश्यकता बताई गई।

साक्ष्य आधारित योजना का उद्देश्य यह है कि गांवों में विकास कार्य केवल अनुमान के आधार पर न चुने जाएं, बल्कि स्थानीय जरूरत, उपलब्ध संसाधन और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को ध्यान में रखकर योजनाएं तैयार हों।

इससे पंचायतों के स्तर पर विकास योजनाओं की उपयोगिता बढ़ने की उम्मीद है।

पारदर्शिता और जवाबदेही भी अहम मुद्दा

तीन दिवसीय सम्मेलन में पंचायत स्तर पर बेहतर अभिशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।

योजना के तहत होने वाले कार्यों की प्रक्रिया, भुगतान व्यवस्था और कार्यों की निगरानी को लेकर जनप्रतिनिधियों को आवश्यक जानकारी दी गई। मजदूरी और सामग्री के भुगतान से संबंधित विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

पंचायत प्रतिनिधियों की ओर से सम्मेलन के दौरान विभिन्न समस्याएं और सवाल उठाए गए। अधिकारियों ने संबंधित मुद्दों पर आवश्यक जानकारी देते हुए उनके समाधान के लिए मार्गदर्शन दिया।

आधारभूत संरचना को मजबूत करने की जरूरत

सम्मेलन में इस बात पर भी जोर दिया गया कि योजना को सफल बनाने के लिए केवल रोजगार उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होगा। इसके साथ गांवों में टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण परिसंपत्तियों का निर्माण भी जरूरी है।

इसी उद्देश्य से योजना के तहत आधारभूत संरचना को विकसित और मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पंचायतों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने की दिशा में भी जानकारी दी गई।

रोजगार के साथ गांवों का विकास

VB-G RAM G योजना को ग्रामीण विकास के व्यापक नजरिये से लागू किए जाने की बात सम्मेलन में सामने रखी गई। योजना के माध्यम से एक ओर ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और दूसरी ओर गांवों में उपयोगी आधारभूत संरचना तैयार करने की संभावना पर चर्चा हुई।

यदि योजनाओं का चयन स्थानीय जरूरतों के आधार पर किया जाता है और उनका क्रियान्वयन पारदर्शी तरीके से होता है, तो इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के साथ-साथ लंबे समय के विकास को भी गति मिल सकती है।

जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण

सम्मेलन में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया। योजना की जानकारी आम ग्रामीणों तक पहुंचाने से लेकर स्थानीय जरूरतों के अनुसार कार्यों की पहचान और उनके क्रियान्वयन की निगरानी तक पंचायतों की भागीदारी अहम होगी।

तीन दिवसीय कार्यक्रम के माध्यम से जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच योजना को लेकर बेहतर समन्वय बनाने की कोशिश की गई।

समस्तीपुर में आयोजित यह सम्मेलन ऐसे समय हुआ है जब ग्रामीण रोजगार और पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं को नए ढांचे के साथ लागू करने पर जोर दिया जा रहा है। आने वाले समय में योजना का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि ग्राम पंचायतें इसकी प्रक्रियाओं को कितनी प्रभावी तरीके से जमीन पर लागू कर पाती हैं।

ग्रामीण रोजगार के साथ टिकाऊ विकास की चुनौती

ग्रामीण रोजगार योजनाओं की सफलता केवल रोजगार के दिनों की संख्या से तय नहीं होती। असली महत्व इस बात का है कि रोजगार के साथ गांवों में ऐसी परिसंपत्तियां बनें, जिनका लाभ ग्रामीण परिवारों को लंबे समय तक मिलता रहे।

VB-G RAM G के तहत जल सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचे, आजीविका और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों को शामिल करना इसी दिशा में एक व्यापक सोच को दर्शाता है।

लेकिन किसी भी योजना की सफलता के लिए पंचायत स्तर पर पारदर्शिता, सही योजना चयन और प्रभावी निगरानी जरूरी है। जनप्रतिनिधियों को योजना की स्पष्ट जानकारी देना और ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

समस्तीपुर का तीन दिवसीय पंच सम्मेलन इसी तैयारी को मजबूत करने की दिशा में एक प्रयास के रूप में देखा जा सकता है। अब चुनौती इन चर्चाओं को जमीन पर ठोस विकास कार्यों में बदलने की होगी।

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